परिचय
वर्ष 1962 में परम पूज्य हरि सिंह जी महाराज से प्रेरणा लेकर लोकनायक स्वर्गीय जय नारायण व्यास, स्वर्गीय एडी बोरा,
श्री हुकुम चंद जी बढ़िया और श्री राम नारायण जी कल्ला ने दिल्ली में अखिल भारतीय पुष्करणा ब्राह्मण सम्मेलन की स्थापना की|
इस संस्था का प्रथम अधिवेशन दिल्ली में 14, 15 अगस्त 1962 को आयोजित किया गया| इसकी अध्यक्षता नागपुर के वैद्य पंडित
शिव करण शर्मा संगानी ने की| इसी सम्मेलन में संस्था का कोई मुखपत्र प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया और एक बुलेटिन
पुष्करणा संदेश के नाम से प्रारंभ किया, जो वर्तमान में नियमित रूप से प्रकाशित होने वाला 36 पेज का दो रंगी आवरण प्रश्नों वाला मासिक
मुखपत्र है|
वर्ष 1965 में संगठन की प्रतिनिधि सभा की बैठक मुंबई में आयोजित की गई| इस बैठक में समाजसेवी एवं सुप्रसिद्ध उद्योगपति स्वर्गीय पी.ऐम. जोशी को अध्यक्ष
बनाया गया| यह संगठन के लिए टर्निंग प्वाइंट था| यही संगठन ने अखिल भारतीय रूप लेना प्रारंभ किया एवं पी. एम. जोशी के अथक प्रयासों से सारे देश में
संगठन की शाखाएं स्थापित की गई| जिस किसी नगरिया प्रांत में समाज की कोई और संस्था सक्रिय थी तो उसे मान्यता दी गई| स्वर्गीय जोशी ने संपूर्ण भारत का
भ्रमण किया|
18 अक्टूबर 1967 को फलौदी में अखिल भारतीय पुष्करणा ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित किया गया| पूरे देश से यहां पर प्रतिनिधि उपस्थित हुए
और स्वर्गीय पी.एम. जोशी को विधिवत अध्यक्ष घोषित किया गया| इसी अवसर पर स्वर्गीय सरदारमल थानवी के संपादन में पुष्करणा संदेश का
विशेषांक निकाला गया और यहीं से अखिल भारतीय संगठन का केंद्रीय कार्यालय तथा पुष्करणा संदेश का कार्यालय दिल्ली से जोधपुर हस्तानत्रित
किया गया|
समाज का उत्साह एवं सहयोग इस समय चरम पर था इसे भापकर स्वर्गीय पी. एम. जोशी ने योजनाबद्ध रूप से संविधान की संरचना की
और इसका पंजीयन भी कराया| इस सारे कार्य को समाज से स्वीकृत कराने हेतु नागपुर में अखिल भारतीय पुष्करणा ब्राह्मण सम्मेलन का
अधिवेशन आयोजित किया जो 3 दिन चला| इस अधिवेशन में केंद्रीय पुष्करणा कार्यालय ट्रस्ट बनाना तय हुआ जिसमें एक को रुपए की
राशि का प्रावधान रखा गया| यहीं पर नई कार्यसमिति की घोषणा की गई| अधिवेशन में अखिल भारतीय पुष्करणा ब्राह्मण सम्मेलन का नाम
बदलकर अखिल भारतीय पुष्टिकर सेवा परिषद किया गया| कुछ समय बाद अक्टूबर 1967 में स्वर्गीय जोशी जी ने त्यागपत्र दे दिया और
स्वर्गीय प्रोफेसर ई. डी. बोहरा को अध्यक्ष बनाया गया| पुष्करणा संदेश का कार्यालय इंदौर आ गया| फिर 1977 तक कोई सम्मेलन नहीं हुआ|
कोलकाता में पुष्टिकर सभा के तेरे अधिवेशन में बीकानेर में अखिल भारतीय पुस्तक सेवा परिषद के अधिवेशन की घोषणा की गई तथा स्वर्गीय
द्वारका प्रसाद जोशी एडवोकेट को अधिवेशन का स्वागत अध्यक्ष बनवा कर स्वागत समिति गठित की गई| इस अधिवेशन में स्वर्गीय श्री
नथमल जी व्यास इंदौर को अध्यक्ष चुना गया बीकानेर में आयोजित इस अधिवेशन की विशेषता यह थी कि इसमें प्रारंभिक संस्थापकों ने
सहभागिता की थी| 1978 में कार्य समिति की पहली बैठक कलकत्ता में आहूत की गई इस बैठक के बाद कोई बैठक नहीं होने से फिर
निष्क्रियता आ गई पुष्करणा संदेश का प्रकाशन भी और नियमित होने लगा| संगठन को पुनः सक्रिय करने के उद्देश्य से फलौदी में 1987
में अधिवेशन आयोजित किया गया तथा श्री मधुसूदन जी व्यास अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किए गए|
इसके पश्चात जैसलमेर में 1992 में अधिवेशन हुआ और गोवर्धन जी कल्ला को अध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया|
श्री कल्ला ने संगठन को व्यापक स्तर पर बढ़ाया और देश के विभिन्न स्थानों पर कार्यसमिति की बैठक के आयोजित की| इनके कार्यकाल में
अखिल भारतीय पुष्टिकर सेवा परिषद की देश में विभिन्न संस्थानों पर 25 शाखाएं और 25 संबंध संस्थाएं सक्रिय हुई| केंद्रीय कार्यालय जोधपुर
में स्थापित किया गया परिषद का मुखपत्र पुष्करणा संदेश पुणे जोधपुर से प्रकाशित होने लगा|
परिषद का लोगों तथा श्रावण शुक्ल तेरस को पुष्करणा दिवस के रूप में मनाने को स्वीकृति दी गई| परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव समय
पर हो सके इसके लिए चुनाव संबंधी नियम बनाए गए मतदाता सूची बनाई गई| श्रीमती कमलेश जोशी एडवोकेट को चुनाव अधिकारी नियुक्त
किया गया| उन्होंने सुनियोजित ढंग से चुनाव कार्यक्रम संपन्न करवा कर बीकानेर निवासी स्वर्गीय डीपी जोशी एडवोकेट को निर्विरोध निर्वाचित
घोषित किया| श्री जोशी जी ने सभी संगठन में सक्रियता लाने हेतु एवं कार्यक्रम प्रसार की दृष्टि से 1998 में श्री शंकर लाल हर्ष को कार्यवाहक
अध्यक्ष बनाया तथा 21, 22 मार्च 1998 को कोलकाता में कार्यसमिति की बैठक आहूत की उन्होंने अपने कार्यकाल में जोधपुर में केंद्रीय कार्यालय
के लिए पुष्करणा भवन का निर्माण करवाकर पूर्व अध्यक्ष के संकल्प को पूरा किया पुष्करणा संदेश नियमित रूप से प्रकाशित होने लगा समय
समय पर बैठक आयोजित होती रही महिला एवं युवा संगठन भी सक्रिय होने लगी|
दिनांक 25 एक 1999 को डॉ गोपाल जोशी को निर्विरोध घोषित किया गया| डॉ जोशी की अध्यक्षता में दिनांक 3 व 4 जून 2000 को कोलकाता
में नवम राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किया गया| इस अधिवेशन में पुष्करणा संदेश को बीकानेर से प्रकाशित करने का प्रस्ताव पारित किया गया|
तभी से संदेश नियमित रूप से सभी पाठकों को निरंतर प्रेषित किया जा रहा है इस समय यह देश के 65 नगरों में तकरीबन 4000 समाज बंधुओं
को वितरित किया जा रहा है| आज की तारीख में परिषद की 31 शाखाएं एवं 21 संबंधित शाखाएं विधिवत रूप से कार्य कर रही हैं|
विभिन्न प्रकार के रचनात्मक एवं संगठनात्मक कार्यक्रम अधिकांश शाखाएं आयोजित करती हैं अधिकांश नगरों में महिला एवं युवा संगठन की भी
शाखाएं कार्यरत हैं| इसके अतिरिक्त आर्थिक चिकित्सा व्यापार ग्रामीण व शिक्षा प्रकोष्ठ आदि का भी गठन कई स्थानों पर हो चुका है
गत 57 वर्षों की यह यात्रा अखिल भारतीय पुष्टिकर सेवा परिषद को विभिन्न उतार-चढ़ाव देती हुए नए आयाम स्थापित करने के लिए कटिबद्ध है|
सभी समाज बंधुओं से अनुरोध है कि पुष्करणा समाज का आकाश की ऊंचाई तक ले जाने के लिए एक दूसरे से संपर्क करें सहयोग करें एवं इस
लक्ष्य को प्राप्त करने की प्रतिज्ञा करें|